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Wednesday, November 26, 2014

मसाई मारा

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होने वाली है सभ्यता शिकार स्वयं अपनी
खूबसूरत मसाई मारा के बीहड़ जंगलों में
इसी साल दो हज़ार चौदह के अंत तक
और हुआ है जारी फरमान मसाइयों को
उनकी ऐतिहासिक मातृभूमि छोड़ने का
कि चाहिए शिकारगाह शाही परिवार को 
जो करता है वास विश्व के आधुनिक शहर में
जिसे हम जानते है दुबई के नाम से
और सभ्यता के नए पायदान पर
खरीद लिया है दुबई के शाही परिवार ने
ज़मीन का एक टुकड़ा तंज़ानिया में
जहाँ वो करेंगे परिभाषित सभ्यता को
नए शिरे से अपनी सहूलियत के मुताबिक

दिखाकर सभ्यता को अपनी पीठ

पीड़ा से होगा पीला मसाई में उगता सूरज अब 
जिसे देखने जाते थे दुनिया के हर कोने से लोग
रहेगा भयभीत चिड़ियों के कलरव से भरा जंगल
और गूंजेगी आवाज़ दहशत की चारों ओर


जहाँ झेलना होगा दर्द विस्थापन का
मसाई लोगों को अपनी ही माटी से
दुखी हो रहा है सभ्यता का इतिहास
कि उसे करनी होगी पुनरावृति दर्द की


----सुलोचना वर्मा-------

Friday, May 30, 2014

सोने की चिड़ियाँ

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विश्व के मानचित्र पर
आज भी चिन्हित है वह देश
कहलाता था जो कभी विश्व गुरु
और था समृद्ध हर दृष्टि से  
हर लड़का होता था कान्हा उस देश का
और राधा कही जाती थी लडकियां

जब वहाँ हर डाल पर होता था बसेरा
सोने की चिड़ियाँ का
अक्सर बन जाया करती थी कुछ नारी
गणिका, नगरवधू या देवदासी
और ठीक उसी समय
पुरुष रहा करता था केवल पुरुष

जहाँ नारी स्त्री से बन जाती थी सती
पुरुष बना रहता था पति
मृत्यु शैया तक
जहाँ रानियों को मान लेना होता था जौहर
पुरुष बना रहता था शौहर
बहुपत्नीवाले सभ्य समाज में
नहीं थी शिकायत किसी को भी
समाज की इस दोहरी बनावट से
ना ही स्त्री को , ना ही पुरुष को
और असर था यह ज्ञान का
जो दिया जाता रहा लिंग के आधार पर

आधुनिकता के इस दौर में 
सचमुच की जीवित चिड़ियों के साथ
गायब है सोने की चिड़ियाँ डाल पर से
नहीं रोते लोग यहाँ अब लड़की के जन्म पर
उसे तो जन्म लेने ही नहीं देते
और जो ले चुकी है जन्म
करते हैं उनका शोषण; हर प्रकार से
फिर लहराते हैं किसी पेड़ पर परचम
अपने पुरुषत्व का डंके की चोट पर

तरक्की कर ली है हमने हर मायने में
और जारी है हमारा सभ्य होते रहना
इतना सभ्य हो जाएगा
इस समाज का पुरुष  निकट भविष्य में
बाँट लेगा पत्नी को भाई -बंधुओं में
बता देगा इस कृत्य को माँ का परम आदेश
और माँ ? क्या करेगी माँ ?
खींच देगी बहु का घूंघट कुछ ज्यादा ही लम्बा
कि नहीं करना पड़े सामना
उसकी आँखों में तैरते सवालों का
दर्द का, नफरत का
या समझा लेगी खुद को यह कहकर
कि गलती कर जाया करते हैं लड़के
या फिर जश्न मना रही होगी
अपनी अजन्मी बेटियों को जन्म नहीं देने का

ये सिलसिला चलता रहेगा तब तक
जब रह जायेगी धरती पर
एक अकेली औरत
ठीक उसी समय आएगा
किसी धर्म का कोई गुरु
जो बांचेगा ज्ञान यह कहकर
कि बनाया है औरत को उसने अपनी पसली से
और उस औरत का धर्म होगा तय
सभ्यता को आगे बढ़ाना !!!!

इस प्रकार पार कर
असभ्यताओं की सारी सीमाएं
करेगा मानव प्रवेश पुनः
किसी सभ्यता वाले युग में
जहाँ हर डाल पर फिर होगा बसेरा
सोने की चिड़ियाँ का |


सुलोचना वर्मा

Sunday, December 15, 2013

सभ्यता

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अहिल्या का शीलहरण सतयुग में हुआ
देवराज इन्द्र की ऐसी क्या लाचारी थी
सीता का अपहरण और फिर अग्नि परीक्षा
उस युग में भी सभ्यता नारी पर भारी थी


सतयुग की अहिल्या, त्रेता की सीता
द्वापर में देवकी पर कंस की पहरेदारी थी
देने को बढ़ावा इन प्रथाओं को कलियुग में
नारी को लगी शोषण की बीमारी थी


क्यूँ करें दोषारोपण पश्चिमी सभ्यता को
उन्हे कहाँ इतनी विविध जानकारी थी
विष कन्या हो, या वैशाली की नगर वधू
इतनी गौरवमयी विरासत तो हमारी थी


खजुराहो के मध्यकालीन मंदिरों में उकेरा
संभोग की विभिन्न कलाओं की चित्रकारी थी
भारतीय वस्तुकला के उस प्राचीन दौर में भी
विश्व की सर्वश्रेष्ठ व मनोरंजक वस्तु नारी थी


सुलोचना वर्मा