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Monday, February 12, 2018

सेल्फी

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मृणाल यूँ तो साधारण दिखने वाली छरहरे बदन की साँवली लड़की थी, पर उसकी एक जोड़ी आँखों में वो चमक थी कि जो भी उसे देखता रौशन हो जाता | वो अपनी हिरणी जैसी आँखों से जिसे देखती उसकी आँखों पर जमी काई हट जाती और उन आँखों में फिर मृणाल का ही सपना तैरता | उसे तरह -तरह से सेल्फी लेने का बेहद शौक था और उसने सेल्फी कला में महारत हासिल कर ली थी| अगरतला के एक होटल व्यवसायी ने एकबार अंतरजाल पर उसकी सेल्फी देख उसका पता लगाया और फिर उससे संपर्क साधा | फिर मिलने के बहाने तलाश किए जाने लगे | मिलने का मतलब होता था ढेर सारे उपहार और महंगे होटलों में खाना |  कुछ ही महीनों में मृणाल को विवाह का प्रस्ताव भी मिला | समाज के एक मध्यम वर्गीय परिवार में पली-बढ़ी लड़की के लिए यह किसी स्वप्न से कम न था | मृणाल ने अपने पिता को विवाह प्रस्ताव से अवगत करवाया | पहले तो यह सुनकर कि उनकी बेटी किसी से प्रेम करती है, वह अपना आपा खो बैठे | फिर जैसे ही उन्होंने लड़के का नाम सुना, तो पहचान गए | वह शहर का जाना - माना होटल व्यवसायी था | उनकी आँखें चमक उठीं | इतने बड़े घर में रिश्ते की बात तो वह सोच भी नहीं सकते थे | लड़के का ब्राह्मण न होना अब कोई बड़ी बात नहीं थी | वो झट से तैयार हो गए | एक महीने के अंदर शादी भी हो गयी | खूब धूमधाम से संपन्न हुई थी शादी | मृणाल के पिता इस शादी से बेहद संतुष्ट थे |

शादी के चौथे दिन देर रात कोई दरवाजा ज़ोर-ज़ोर से पीट रहा था | मृणाल के पिता सोने ही गए थे कि असमय दस्तक से चौंक दरवाजे तक गए | दरवाजा खोलने से पहले पूछा "कौन"

"मैं, मैं हूँ बाबा, जल्दी दरवाजा खोलिए" मृणाल ने रुंधे हुए गले से कहा |

हडबडाहट में दरवाजा खोला गया | मृणाल नाईट गाउन पहने नंगे पाँव ही चली आई थी | उसे देख घर के लोग हैरान थे | 

"अरे ! ऐसे कैसे चली आई हो? क्या हुआ ? सब ठीक तो है न" एक साथ कई आवाजें गूँजी |

"जल्दी दरवाजा बंद करो | कुछ भी ठीक नहीं | बाबा, आप मुझे कहीं छुपा दीजिए न" मृणाल बेतहाशा रो रही थी|

"पर हुआ क्या" मृणाल की माँ ने उसे एक ओर खींचते हुए पूछा |

"वो दूसरे कमरे में फोन पर था | मैंने उसकी सारी बातें सुन लीं | मैंने अपनी कानों से सुना कि कल वो हनीमून के बहाने मुझे दुबई ले जाएगा और वहाँ मुझे बेच देगा | कीमत भी तय हो चुकी है" मृणाल काँप रही थी |

मृणाल के पिता ने उसकी माँ से विमर्श किया और उसी रात मृणाल को लेकर वे दूर किसी गाँव में मृणाल की मौसी के पास चले गए | मृणाल का वहाँ रहना हर दृष्टि से सुरक्षित था | उस गाँव में बिजली न के बराबर रहती थी, यातायात के साधन भी सीमित थे और वह मौसी उसकी शादी में भी किसी कारण से नहीं आ पायी थीं, इसलिए उनसे वर पक्ष के किसी का कोई परिचय भी नहीं था | 

कई महीने गुजर गए| न तो मृणाल के ससुराल से कोई उसकी खबर लेने उसके मायके आया और मृणाल के घरवालों ने भी उनसे कभी संपर्क साधने की कोशिश नहीं की | मृणाल अपनी मौसी के यहाँ इस डर के साथ जी रही थी कि किसी रोज़ उसका पति उसे ढूँढता हुआ वहाँ न आ धमके | मृणाल के माता - पिता हर महीने एकबार  आकर उसे देख जाते और चिंतित होते | मृणाल अपने हृदय के व्याघात को वाणी भले ही न देती हो, पर माता-पिता उसके चेहरे से सब पढ़ लेते | 

एक साल बाद मृणाल के पिता को पता चला कि उस होटल व्यवसायी ने फिर से शादी की | एकबार उनके मन में आया कि पुलिस को इत्तिला कर सब बता देना चाहिए पर अगले ही पल उन्होंने विवेचना की कि उस होटल व्यवसायी के पास इतनी संपत्ति है कि वह लगभग सभी कुछ खरीद सकता है| वह एक और लड़की की जिंदगी खराब होने से बचाना तो चाहते थे, पर अपनी बेटी की कीमत पर नहीं | उन्होंने सोचा शायद इसी में मृणाल की मुक्ति निहित है और तय किया कि वह कुछ नहीं कहेंगे | इस घटना के सात महीने बाद उन्होंने दूर शहर के एक लड़के से मृणाल की शादी कर दी | शादी मृणाल की मौसी के घर से सम्पन्न हुआ | मृणाल के नए ससुराल वालों को उसका नाम मेघबालिका बताया गया | 

मृणाल अपनी मौसी के घर रहते हुए घर के कामों में दक्ष हो गयी थी| फिर चुपचाप रहते हुए कब मौन रहना उसकी आदत में शुमार हो गया, उसे भी पता न चला | चुप रहकर घर का सारा काम करने वाली स्त्री किसे अच्छी नहीं लगेगी ! बहुत कम समय में उसने अपने नए ससुराल में सभी लोगों का मन मोह लिया | साल भर बाद जब उसने एक बेटे को जन्म दिया, तो दोनों परिवारों में उत्सव सा माहौल था | लगभग दो सालों के बाद मृणाल के चेहरे पर मुस्कान देख उसके माता-पिता संतुष्ट और खुश थे |

बेटा रोज़ थोड़ा-थोड़ा बड़ा हो रहा था और मेघबालिका रोज़ थोड़ा-थोड़ा मृणाल हुई जाती थी | कभी फोन से बेटे की तस्वीरें लेती तो कभी खुद की उसके साथ सेल्फी |  सुंदर -सुंदर सुखद तस्वीरों से भरा साल बीत गया और बेटा एक साल का हो गया | मृणाल ने अपने नए जीवन साथी को कभी बताया था कि जब कंचनजंघा पर भोर का सूरज अपनी लालिमा बिखेरता है, तो उस दृश्य को देखने वाला इंसान सभी कुछ भूल जाता है| बेटे के जन्मदिन पर तय हुआ कि तीनों प्राणी दार्जिलिंग घूमने जाएँगे और उस दृश्य का साथ आनन्द उठाएँगे | पाँच घंटे के सफर के बाद मृणाल बेटे और पति, राजीव के साथ दार्जिलिंग में थी | वह अतीत की यादों में देर तलक डूबी रही | शाम के चार बजे घूमते हुए वे एक बेकरी तक गए | अंदर जाकर देखा बेकरी बस नाम में ही था, वह दरअसल एक छोटा सा रेस्तरां था | बेटे के जन्मदिन का केक काटा गया और रेस्तरां में मौजूद लोगों में बाँटा गया | ढ़ेरों तस्वीरें ली गईं | रात का खाना खाकर जल्द ही होटल आने का कार्यक्रम था | सुबह कंचनजंघा पर सूरज का जादू देखना था | 

कार्यक्रम के मुताबिक वे अलसुबह होटल से निकले | रास्ते में जगह-जगह रुककर सेल्फी ली गयी | अंततः वे उस जगह पर पहुँच ही गए जहाँ उनके साथ अन्य सैलानी भी टाइगर हिल पर उगते हुए सूरज का इन्तजार कर रहे थे | लगभग आधे घंटे बाद सूर्योदय हुआ और कुछ देर के लिए वहाँ खड़े सभी लोगों की साँसे रुक गयीं | नजारा था ही ऐसा अलौकिक | मृणाल ने पहले टाइगर हिल पर सूरज की स्वर्णिम किरणों के बिखरते जादू को फोन के कैमरे में क़ैद किया और फिर उसने टाइगर हिल के उस मनोरम दृश्य के साथ पति और बेटे की तस्वीर ली | पास से तीनों का टाइगर हिल के साथ वाली सेल्फी में उनका चेहरा ही दिख रहा था, टाइगर हिल नहीं दिख रहा था | मृणाल ने राजीव से कहा भी कि वह किसी दूसरे सैलानी से आग्रह करे कि वह इन लोगों की तस्वीर खींच दे पर राजीव को किसी अजनबी के हाथों में फोन देना सुरक्षित न लगा और उसने कहा कि वह खुद ही थोड़ी दूरी पर आगे जाकर सेल्फी ले लेगा | वह फोन को सेल्फी मोड में रखकर फोन में देखता हुआ आगे बढ़ने लगा | फोन में उसकी नजरें कंचनजंघा पर टिकी थीं और उसका पीठ मृणाल की ओर थी | मृणाल ने अचानक गौर किया कि वह आगे बढ़ता ही जा रहा है और उसके चार कदम आगे गहरी खाई है| 

"ठहरो" वह चिल्लाई | पर वह उस मनोरम दृश्य में इस कदर खो चुका था कि जब तक वह समझ पाता कि यह उसकी मेघबालिका की आवाज है, उसके पाँव के नीचे से जमीन जा चुकी थी और वह हवा में तैरता हुआ खाई में गिर रहा था | सैलानी, जो अभी तक कंचनजंघा देखने में व्यस्त थे. उस ओर दौड़ पड़े और फोटो लेने लगे | मृणाल उन तस्वीरों में कहीं नहीं थी |