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Tuesday, November 25, 2014

सुबह

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उजियाली उतर आई भोर की सीढ़ियाँ
थामकर सूरज का हाथ ,
गा रही है कोयल उनके स्वागत में गीत ,
नहीं करने देता महसूस झर झर बहता झरना
कमी किसी प्रकार के वाद्ययंत्र की ,
बिन घुँघरू बांधे मोर कर रहा है रियाज
अपने चिरपरिचित सूफियाने अंदाज में
और पर्वत ??
कर रहा है अवलोकन
केवल एक अच्छा श्रोता बन 
किसी के रूप का ; तो किसी के हूनर का
निखर रही हैं डाल पर कोपलें
पाकर सुरभित बयार का स्नेहिल स्पर्श,
और पखार रहा है मेघ धरणी का चरण


बेहद खूबसूरत होता है जागना कभी कभार
तन्द्रा का टूटना जिसे कहते हैं


-----सुलोचना वर्मा --------

 

Thursday, February 27, 2014

सूरज

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सूरजमुखी के ख्वाहिशों का सूरज
जा बसा है दूर पश्चिम की ओर
और उसकी सुनहरी धूप सहला रही है
पीले टेशुओं वाले अमलताश को
किरणों ने बना लिया है पीले फूलों का गजरा
और खोंस लिया है अपने बालों में
इधर सिर झुकाए खड़ी है सूरजमुखी
कर रही है अवलोकन अपनी इच्छाओं का
बेहद करीब से देख लिया है
इस पुरे घटनाक्रम को
दूर से झांकते दहकते पलाश ने
और हो रहा है लज्जित अपने समलैंगिग रिश्ते पर
उधर निखर रहा है अमलताश
नए रिश्ते की गुनगुनी धुप पाकर
कल जब अलसाई सी धुप
उतर आएगी सूरजमुखी के आँगन
तो नहीं लगेगा कोई अभियोग सूरज पर
धुप में एकबार फिर नहाएगी सूरजमुखी
नहीं तौलेगी सूरज की मंशा प्रेम के तराजू पर
मुस्कुराकर कह देगी सम्बन्ध में अनुबंध नहीं होते

(c)सुलोचना वर्मा

Saturday, January 25, 2014

रंग अनुराग का

यामिनी के आँचल में
छिपता है देखो सूरज
लोहित है, जो प्रखर है
दहकता सा गोला आग का
लगता है रंग काला है
प्रीत का, अनुराग का


भोजराज बँधे प्रणय-सूत्र में
पर बन ना पाए कारण
कभी मीरा की प्रीत का
कभी मीरा के वैराग का
लगता है रंग काला है
प्रीत का, अनुराग का


लाल-पीले टेसू और सरसों के फूल
है सुवासित पुष्प परिणाम
मकरन्दि मायाजाल का
भ्रमर के गुनगुन राग का
लगता है रंग काला है
प्रीत का, अनुराग का


जब धरा करती घन का आह्वान
तज कर दिनकर की तपिश
वसुधा को मिलता है अमृत
तब सौदामनि के त्याग का
लगता है रंग काला है
प्रीत का, अनुराग का


सुलोचना वर्मा

 

Saturday, December 7, 2013

दिनकर

मेरी निशि की दीपशिखा
कुछ इस प्रकार प्रतीक्षारत है
दिनकर की एक दृष्टि की
ज्यूँ बाँस पर टँगे हुए दीपक
तकते हैं आकाश को
पंचगंगा की घाट पर


जानती हूँ भस्म कर देगी
वो प्रथम दृष्टि भास्कर की
जब होगा प्रभात का आगमन

स्निग्ध सोंदर्य  के साथ
शंखनाद होगा और घंटियाँ बज उठेंगी
मन मंदिर के कपाट पर


मद्धिम सी स्वर-लहरियां करेंगी आह्लादित प्राण
कर विसर्जित निज उर को प्रेम-धारा में
पंचतत्व में विलीन हो जाएगी बाती
और मेरा अस्ताचलगामी सूरज
क्रमशः अस्त होगा
यामिनी के ललाट पर


 सुलोचना वर्मा